Wednesday, January 9, 2008

ये तस्वीरें कुछ बोलती हैं




ये दो तस्वीरें है। पहली तस्वीर की तारीख सात जनवरी। स्थान नार्थ ब्लाक िस्थत वित्त मंत्रालय। मौका-बजट से पहले किसानों से चर्चा। दूसरी तस्वीर की तारीख आठ जनवरी। स्थान नार्थ ब्लाक िस्थत वित्त मंत्रालय। मौका बजट से पहले उद्योगपतियों से मुलाकात।
देश के तमाम अखबार उठाइए। आप पाएंगे कि क्या हिंदी या अंग्रेजी क्या कोई भाषाई अखबार, सभी ने उद्योगपतियों से चिदंबरम से हुई मुलाकात की रंगीन तस्वीरें छापी हैं। इस तस्वीर में अपने वित्त मंत्री उद्योगपतियों से मुस्कुराते हुए मिल रहे हैं। किसानों से हुई मुलाकात की तस्वीर में चिदंबरम की मुस्कुराहट गायब है। और तस्वीरें भी अखबारों में ब्लैक-व्हाइट छपी है।
तस्वीरों से पीछे का सच और भी कड़ुवा है। चिदंबरम किसानों से केवल दस मिनट के लिए। और उद्योगपतियों से ... अनुमान लगाइए... क्या सवा घंटे?
क्या सचमुच भारत किसानों का देश है? क्या खेती व किसानों के लिए मात्र दस मिनट काफी है?